5 दिग्गज क्रिकेटर… जिन्होंने एक नहीं, दो देशों के लिए खेले वनडे मैच, बदल दिया क्रिकेट का नक्शा


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5 cricketer who Representing two countries in ODI: इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे अद्भुत मोड़ आए जब खिलाड़ियों ने एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग देशों की जर्सी पहनी. केप्लर वेसल्स, क्लेटन लैंबर्ट और जेरेंट जोन्स जैसे 5 दिग्गजों की यह कहानी महज आंकड़ों का फेरबदल नहीं है, बल्कि सीमाओं से परे क्रिकेट के जुनून, बदलते वक्त और मैदान पर लिखे गए अनोखे इतिहास की एक दिलचस्प दास्तान है.

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कौन हैं वो 5 क्रिकेटर जिन्होंने दो देशों की ओर से वनडे क्रिकेट खेली ?

नई दिल्ली.  इंटरनेशनल क्रिकेट की दुनिया में किसी भी खिलाड़ी के लिए अपने देश की जर्सी पहनना जीवन के सबसे बड़े सपनों में से एक होता है. लेकिन क्रिकेट के इस अनूठे इतिहास में कुछ ऐसे लम्हे भी आए, जब खिलाड़ियों ने परिस्थितियां बदलने पर एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व किया. अवसरों की तलाश, नागरिकता के बदलाव या फिर मातृभूमि के प्रति लगाव के कारण इन खिलाड़ियों की राहें जरूर बदलीं, लेकिन खेल का जुनून हमेशा एक जैसा रहा. आइए, ऐसे ही 5 दिग्गज खिलाड़ियों के के बारे में जानते हैं जिन्होंने वनडे इंटरेनशनल क्रिकेट में दो देशों की ओर से खेला और बल्लेबाजी और गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन किया.

केप्लर वेसल्स (Kepler Wessels) का क्रिकेट करियर इंटरनेशनल स्टेज पर किसी बेहद नाटकीय मोड़ से कम नहीं रहा. दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बैन होने के चलते वेसल्स ने ऑस्ट्रेलिया का रुख किया. साल 1983 से 1985 के बीच ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलते हुए उन्होंने 54 वनडे मैच खेले. इस दौरान 36.25 की शानदार औसत के साथ उनके बल्ले से 1740 रन निकले, जिसमें 107 रनों की एक शतकीय पारी भी शामिल थी. सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, अपनी मध्यम गति की गेंदबाजी से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 18 विकेट भी चटकाए. इसके बाद जब दक्षिण अफ्रीका से बैन हटा, तो वे वापस अपनी मातृभूमि लौटे और 1991 से 1994 के बीच 55 वनडे मैचों में दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी और बल्लेबाजी संभाली. यहां उन्होंने 32.54 की औसत से 1627 रन बनाए, जिसमें नाबाद 90 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा. दोनों देशों के लिए खेलते हुए वेसल्स ने न केवल 3300 से अधिक रन बनाए, बल्कि फील्डिंग में कुल 39 कैच भी लपके.

कैरिबियाई पावर क्लेटन लैंबर्ट का अमेरिकी नई शुरुआत
वेस्टइंडीज़ के आक्रामक सलामी बल्लेबाज क्लेटन लैंबर्ट (Clayton Lambert) की पहचान उनकी बेफिक्र और पावर-हिटिंग बल्लेबाजी थी. 1990 से 1998 के दौर में उन्होंने वेस्टइंडीज़ के लिए 11 वनडे मुकाबले खेले. 33.45 की बढ़िया औसत से उन्होंने कुल 368 रन बनाए, जिसमें इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई 119 रनों की एक यादगार शतकीय पारी शामिल थी. इसके काफी सालों बाद, जब उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग खत्म माना जा रहा था, तब 42 वर्ष की उम्र में वे अमेरिका (USA) चले गए. साल 2004 में उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से 1 वनडे मैच खेला और उसमें 39 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली. इस तरह लैंबर्ट का दो देशों के लिए बनाया गया कुल अंतरराष्ट्रीय स्कोर 407 रन पर समाप्त हुआ.

विंडीज का घातक पेसर, एंडरसन कमिंस बने कनाडा की ढाल
एंडरसन कमिंस (Anderson Cummins) एक समय कैरिबियाई पेस अटैक के बेहद अहम सदस्य माने जाते थे. 1991 से 1995 के बीच वेस्टइंडीज़ के लिए खेलते हुए उन्होंने 63 वनडे मैचों में 28.79 की औसत से 78 विकेट अपने नाम किए. इस दौरान 31 रन देकर 5 विकेट लेना उनका सबसे उम्दा प्रदर्शन रहा. साथ ही निचले क्रम में बल्ले से योगदान देते हुए उन्होंने 15.30 की औसत से 459 रन बनाए, जिसमें नाबाद 44 रन उनका उच्चतम स्कोर रहा. विंडीज टीम से बाहर होने के लंबे अरसे बाद, 2007 विश्व कप के दौरान उन्होंने चौंकाने वाली वापसी की. इस बार कनाडा की जर्सी में. कनाडा के लिए खेले 13 मुकाबलों में उन्होंने 48.53 की औसत से 13 विकेट हासिल किए और 32 रन बनाए. दोनों देशों के मिलाकर उनके नाम 91 वनडे विकेट दर्ज हुए.

डॉगी ब्राउन ने इंग्लैंड और स्कॉटलैंड से खेला
ऑलराउंडर डॉगी ब्राउन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम से की थी. साल 1997 से 1998 के दौरान उन्होंने इंग्लैंड के लिए 9 एकदिवसीय मुकाबले खेले. इस दौरान बल्ले से 24.75 की औसत से 99 रन बनाने के साथ-साथ उन्होंने गेंदबाजी में 43.57 की औसत से 7 विकेट भी अपने नाम किए. आगे चलकर स्कॉटलैंड में जन्मे डॉगी ब्राउन ने अपनी जन्मभूमि का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया. 2006 से 2007 के बीच उन्होंने स्कॉटलैंड के लिए 16 वनडे खेले, जहां उन्होंने 40.93 की औसत से 15 विकेट लिए और बल्ले से 15.71 की औसत से 220 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक (नाबाद 50 रन) भी शामिल था.

जेरेंट जोन्स एशेज का नायक और पीएनजी की जर्सी
जेरेंट जोन्स (Geraint Jones) को दुनिया मुख्य रूप से इंग्लैंड की 2005 की ऐतिहासिक एशेज सीरीज जीत के मुख्य विकेटकीपर के रूप में याद रखती है. 2004 से 2006 के बीच इंग्लैंड के लिए खेलते हुए उन्होंने 49 वनडे मैचों में 24.69 की औसत से 815 रन बनाए, जिसमें 84 रन उनका उच्चतम स्कोर रहा. दस्तानों के साथ वे बेहद मुस्तैद रहे और विकेट के पीछे 68 कैच और 4 स्टंपिंग (कुल 72 शिकार) किए. इंग्लैंड टीम से अलग होने के बाद,अपनी जन्मभूमि पापुआ न्यू गिनी (PNG) के प्रति प्यार उन्हें दोबारा मैदान पर ले आया. उन्होंने पीएनजी के लिए 2 वनडे मैच खेले. हालांकि इसमें वे रन नहीं बना सके और बिना खाता खोले आउट हो गए, लेकिन उन्होंने दो अलग-अलग महाद्वीपों के देशों की नुमाइंदगी करने का एक अनोखा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…

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