WhatsApp, Telegram, Signal पर नया सिम बाइंडिंग नियम, फरवरी 2026 से बदलाव
COAI vs BIF: एक पक्ष में, दूसरी संस्था खिलाफ
देश की सबसे बडी टेलीकॉम संस्था सेल्युलर ऑपरेट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) सरकार के इस कदम का खुलकर स्वागत कर रही है. इनमें रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं. COAI का मानना है कि सिम-बाइंडिंग से यूजर, मोबाइल नंबर और डिवाइस के बीच अटूट संबंध बनेगा. इससे स्पैम, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी को रोकने में काफी मदद मिल सकती है.
दूसरी तरफ ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) इस नियम को ‘समस्याजनक’ बता रही है. इस फोरम के मैंबर्स में मेटा, गूगल और कुछ अन्य टेक कंपनियां हैं. उनका कहना है कि सरकार ने बिना किसी विस्तृत परामर्श और अध्ययन के ऐसा बडा निर्देश जारी कर दिया. आलोचकों का सवाल है कि जब ठग नकली या चोरी की पहचान पर लिए गए सिम कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो क्या सिम-बाइंडिंग सच में धोखाधड़ी रोक पाएगी?
सिम-बाइंडिंग को लेकर कई गलतफहमियां: COAI
IAMI का कहना है कि ये नए नियम ‘स्पष्ट अति-हस्तक्षेप’ (Clear Overreach) हैं और फिनटेक, ई-कॉमर्स, ट्रैवल और सोशल मीडिया जैसे कई डिजिटल क्षेत्रों पर इसका बडा असर पडेगा. क्लीयर ओवररीच शब्द का इस्तेमाल तब होता है जब कोई संस्था अपने स्पष्ट अधिकारों से बाहर जाकर कोई कार्रवाई करती है. इन विरोधों के बाद COAI ने एक और विस्तृत नोट जारी करके सरकार के आदेश का समर्थन दोहराया और दावा किया कि सिम-बाइंडिंग को लेकर कई गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं.
COAI का कहना है कि यह नियम लोगों के लिए किसी तरह की दिक्कत नहीं पैदा करेगा. जैसे यूपीआई और कई पेमेंट ऐप्स पहले से ही उसी सिम को पहचान के तौर पर उपयोग करते हैं, ठीक वैसा ही मॉडल मैसेजिंग ऐप्स पर भी बिना किसी परेशानी के लागू किया जा सकता है. यूजर चाहे विदेश में हों या वाई-फाई का इस्तेमाल कर रहे हों, वे अपनी भारतीय सिम को फोन की दूसरी स्लॉट में रखकर आसानी से ऐप का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं.
सिंगल-सिम फोन वालों को क्या दिक्कत होगी?
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जिनके पास सिंगल-सिम फोन हैं, उन्हें विदेश में दिक्कत होगी. इस पर COAI का जवाब है कि यह सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है. इससे भारत के बाहर बैठे ठगों या किसी भी संदिग्ध तत्व को भारतीय यूजर के नाम पर बिन पहचान वाले अकाउंट चलाने में मुश्किल होगी. संस्था के अनुसार यह नियम आम नागरिकों की सुरक्षा और देश के हित में है. COAI ने यह भी साफ किया कि विदेशी यात्रियों को उस देश के ऐप नियमों के अनुसार सेवाएं मिलती रहेंगी, लेकिन भारतीय यूजर का अकाउंट उसी भारतीय सिम से जुड़ा रहना चाहिए, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी.
हर छह घंटे में वेब वर्जन से लॉगआउट क्या नया है?
COAI का कहना है कि हर छह घंटे में वेब वर्जन से लॉगआउट होना कोई नया या कठिन नियम नहीं है. बैंकिंग पोर्टल, डिजिलॉकर, आधार, वीपीएन, सभी में इससे भी यही सेफ्टी नियम लागू होता है. मोबाइल फोन में तो क्रिप्टोग्राफिक तकनीक से लॉगिन सुरक्षित रहता है, लेकिन लैपटॉप और कंप्यूटर मल्टीपर्पज होते हैं, इसलिए वहां अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी है. COAI के अनुसार, यह हल्का-सा प्रयास यूजर को किसी बड़ी असुविधा में नहीं डालेगा, लेकिन सुरक्षा में बड़ा फर्क जरूर लाएगा.
क्या नई तरह का डेटा कलेक्ट किया जा रहा है?
जो आलोचक इस नियम को हल्का या बेकार बता रहे हैं, COAI उनके तर्कों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया मानता है. संस्था का कहना है कि सिम-बाइंडिंग डिजिटल कम्युनिकेशन में मौजूद एक बड़ी और आम कमजोरी को रोकता है और यह सुरक्षित इंटरनेट की दिशा में आवश्यक कदम है. गोपनीयता से जुडे सवालों पर COAI का स्पष्टीकरण है कि इस नियम से किसी भी तरह का नया डेटा इकट्ठा नहीं किया जा रहा. ऐप सिर्फ यह देखता है कि यूजर की पहचान से जुड़ा वही सिम फोन में मौजूद है, जैसा UPI में होता है. इसलिए यह मॉडल सुरक्षा बढाता है, लेकिन प्राइवेसी में दखल नहीं देता.
क्या इससे कंपनियों के वर्कफ्लो पर असर पड़ेगा?
COAI ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नियम से बिजनेस मैसेजिंग, CRM सिस्टम, API और किसी भी एंटरप्राइज वर्कफ्लो पर कोई असर नहीं पड़ता. नियम सिर्फ यूजर अकाउंट स्तर पर लागू होता है, और कंपनियों के सिस्टम वैसे ही चलते रहेंगे, बस अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर एक वैध और सत्यापित सिम से लिंक होना चाहिए. COAI ने कहा कि भारत में लंबे समय से यह जरूरत महसूस की जा रही थी कि ऐप आधारित कम्युनिकेशन में यूजर की पहचान और सिम के बीच स्पष्ट संबंध रहे, ताकि सुरक्षा बनी रहे और गोपनीयता भी न टूटे.
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