मकर संक्रांति पर जागेश्वर धाम में भगवान शिव घृत कमल गुफा में एक माह के लिए विराजमान, प्रधान पुजारी ने दी जानकारी
Makar Sankranti in Jageshwar dham: देश भर में आज यानी 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व पर धूमधाम से मनाया जा रहा है. वही उत्तराखंड विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान ज्योतिर्लिंग जागेश्वर महाराज घृत कमल की गुफा में एक माह के लिए साधनारत हो गए.
मंदिर प्रबंधन समिति, पुजारियों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने 251 किलो शुद्ध पहाड़ी घी से गुफा बना कर घृत कमल की गुफा में ढक दिया है. विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों के साथ गुफा का निर्माण शुरू हुआ. भगवान शिव अब फाल्गुन मास की प्रथम तिथि को इस गुफा से बाहर आएंगे. महीने भर शिव गुफा की श्रद्धालु पूजा अर्चना करंगे और एक माह बाद शिव साधना से बाहर निकालेंगे.
मंदिर के प्रधान पुजारी ने क्या बताया?
जागेश्वर धाम के प्रधान पुजारी हेमन्त भट्ट ने बताया कि, ‘जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति विशेष रूप से मनाई जाती है. इस वर्ष भी 251 किलो गाय के घी को शुद्ध करके पानी में उबालकर उसकी गुफा बनाई गई और भोलेनाथ को एक माह तक तप के लिए विराजमान किया गया. और यह परंपरा काफी प्राचीन परंपरा है.’
उन्होंने आगे बताया कि, भोलेनाथ ने माघ माह में एक माह तप किया था. उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यहां पर पुरोहितों ने और हमने मिलकर यह परंपरा निभाई है. और मकर संक्रांति मनाने का जो मुख्य कारण है, इसमें भगवान सूर्य जो हैं धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं’.
उत्तराखंड विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान ज्योतिर्लिंग जागेश्वर महाराज घृत कमल की गुफा में एक माह के लिए साधनारत हो गए. मंदिर प्रबंधन समिति और श्रद्धालुओं ने 251 किलो शुद्ध पहाड़ी घी से गुफा बना कर घृत कमल की गुफा में ढक दिया है. pic.twitter.com/OAGtgTpiXc
— Ankur Agnihotri (@Ankuragnihotrii) January 14, 2026
जागेश्वर धाम क्यों हैं प्रसिद्ध?
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में देवदारों के घने जंगलों के बीच स्थित भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिरों का समूह जिसमें 100 से भी ज्यादा मंदिर है, जिसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. महामृत्युंजय महादेव मंदिर यहां का आकर्षण का केंद्र है.
इस स्थान को दारुक वन के रूप में भी जाना जाता है, जहां भगवान शिव ने घोर तपस्या की थी. यहां शिव के लिंगात्मक रूप में पूजा की जाती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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