स्मार्टफोन रिपेयर करवाते समय इन चीज़ों पर गौर नहीं करते लोग, बचाव के हैं आसान तरीके, फिर लगती है मोटी चपत


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जानें कि अपने स्मार्टफोन को सुरक्षित रूप से कैसे रिपेयर करें और अपने निजी डेटा को लीक होने से बचाना बेहद जरूरी है. Repair Mode, Guest Mode और बैकअप-रीसेट के आसान उपाय डिटेल में समझें…

आज के समय में स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है. फोटो, वीडियो, बैंकिंग ऐप्स, सोशल मीडिया और पर्सनल चैट, सब कुछ हमारे डिवाइस में ही होता है. लेकिन अगर यही फोन रिपेयर के लिए देने के बाद आपकी पर्सनल जानकारी लीक हो जाए तो क्या? इसे एक उदाहरण से समझते हैं. दिल्ली में रहने वाली अलिशा पिछले तीन सालों से एक ही स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रही थी.

एक दिन कॉलेज से लौटते समय उसका फोन गिर गया और उसकी स्क्रीन टूट गई. उसने फोन को रिपेयर कराने के लिए एक थर्ड-पार्टी सर्विस सेंटर में दे दिया. कुछ घंटों बाद फोन ठीक हो गया. लेकिन उसी दौरान ईशा के पास अनजान कॉल और मैसेज आने लगे. उसकी निजी जानकारी और पर्सनल डेटा ऑनलाइन लीक हो चुका था.

एक दिन कॉलेज से लौटते समय उसका फोन गिर गया और उसकी स्क्रीन टूट गई. उसने फोन को रिपेयर कराने के लिए एक थर्ड-पार्टी सर्विस सेंटर में दे दिया. कुछ घंटों बाद फोन ठीक हो गया. लेकिन उसी दौरान ईशा के पास अनजान कॉल और मैसेज आने लगे. उसकी निजी जानकारी और पर्सनल डेटा ऑनलाइन लीक हो चुका था.

भले ही यह सिर्फ एक उदाहरण हो, लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. कई लोगों ने शिकायत की है कि फोन रिपेयर होने के बाद उनके निजी फोटो, वीडियो और अन्य संवेदनशील डेटा ऑनलाइन लीक हो गया या फिर उन्हें ब्लैकमेल किया गया.

भले ही यह सिर्फ एक उदाहरण हो, लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. कई लोगों ने शिकायत की है कि फोन रिपेयर होने के बाद उनके निजी फोटो, वीडियो और अन्य संवेदनशील डेटा ऑनलाइन लीक हो गया या फिर उन्हें ब्लैकमेल किया गया.

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फोन रिपेयर के दौरान डेटा कैसे लीक होता है- जब आप अपना फोन ब्रांड के आधिकारिक सर्विस सेंटर में रिपेयर के लिए देते हैं, तो वे आमतौर पर आपसे पूछते हैं कि क्या आपने अपना डेटा डिलीट कर दिया है. अगर नहीं, तो वे फोन का बैकअप लेने और उसे रीसेट करने की सलाह देते हैं.

फोन रिपेयर के दौरान डेटा कैसे लीक होता है- जब आप अपना फोन ब्रांड के आधिकारिक सर्विस सेंटर में रिपेयर के लिए देते हैं, तो वे आमतौर पर आपसे पूछते हैं कि क्या आपने अपना डेटा डिलीट कर दिया है. अगर नहीं, तो वे फोन का बैकअप लेने और उसे रीसेट करने की सलाह देते हैं.

लेकिन जब आप अपना फोन थर्ड-पार्टी सर्विस सेंटर में रिपेयर के लिए देते हैं, तब समस्या शुरू होती है. ऐसे सर्विस सेंटर अक्सर आपके फोन का पासवर्ड या पिन मांगते हैं. इसके पीछे वे कारण बताते हैं जैसे- ‘फोन टेस्ट करना है’ या ‘लॉक होने पर उसे रिपेयर नहीं किया जा सकता.’

लेकिन जब आप अपना फोन थर्ड-पार्टी सर्विस सेंटर में रिपेयर के लिए देते हैं, तब समस्या शुरू होती है. ऐसे सर्विस सेंटर अक्सर आपके फोन का पासवर्ड या पिन मांगते हैं. इसके पीछे वे कारण बताते हैं जैसे- ‘फोन टेस्ट करना है’ या ‘लॉक होने पर उसे रिपेयर नहीं किया जा सकता.’

पासवर्ड देना मतलब पूरा कंट्रोल देना- जब आप पासवर्ड दे देते हैं, तो सामने वाले व्यक्ति को आपके फोन की हर चीज़ का एक्सेस मिल जाता है. फोटो, वीडियो, बैंकिंग ऐप्स, ईमेल, सोशल मीडिया. सब कुछ उनके हाथ में चला जाता है. रिपेयर के बाद फोन वापस मिल जाता है और शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है. लेकिन कुछ समय बाद ब्लैकमेलिंग कॉल आ सकते हैं या आपका डेटा पहले ही लीक हो चुका होता है.

पासवर्ड देना मतलब पूरा कंट्रोल देना- जब आप पासवर्ड दे देते हैं, तो सामने वाले व्यक्ति को आपके फोन की हर चीज़ का एक्सेस मिल जाता है. फोटो, वीडियो, बैंकिंग ऐप्स, ईमेल, सोशल मीडिया. सब कुछ उनके हाथ में चला जाता है. रिपेयर के बाद फोन वापस मिल जाता है और शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है. लेकिन कुछ समय बाद ब्लैकमेलिंग कॉल आ सकते हैं या आपका डेटा पहले ही लीक हो चुका होता है.

सबसे महत्वपूर्ण: कभी भी अपना पासवर्ड न दें- सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि किसी भी सर्विस सेंटर को आपके फोन का पासवर्ड मांगने का अधिकार नहीं है. फोन डायग्नोस्टिक्स के लिए पासवर्ड की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि स्मार्टफोन में इसके लिए अलग से समर्पित फीचर्स मौजूद होते हैं.

सबसे महत्वपूर्ण: कभी भी अपना पासवर्ड न दें- सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि किसी भी सर्विस सेंटर को आपके फोन का पासवर्ड मांगने का अधिकार नहीं है. फोन डायग्नोस्टिक्स के लिए पासवर्ड की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि स्मार्टफोन में इसके लिए अलग से समर्पित फीचर्स मौजूद होते हैं.

मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद लोगों को एक नकली वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर दिया जाता है, जहां उनकी पर्सनल और बैंकिंग डिटेल्स चुरा ली जाती हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल इस तरह की धोखाधड़ियां दोगुनी हो गई हैं.

मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद लोगों को एक नकली वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर दिया जाता है, जहां उनकी पर्सनल और बैंकिंग डिटेल्स चुरा ली जाती हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल इस तरह की धोखाधड़ियां दोगुनी हो गई हैं.

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अगर Repair Mode उपलब्ध न हो तो Guest Mode का इस्तेमाल करें- कुछ पुराने स्मार्टफोन्स में Repair Mode नहीं होता. ऐसी स्थिति में Guest Mode एक अच्छा ऑप्शन है. ये मोड फोन को एक अलग स्पेस में रखता है, जिससे आपकी पर्सनल फाइल्स सुरक्षित रहती हैं. अगर आप अपना फोन किसी दोस्त या सहकर्मी को देते हैं, तब भी यह मोड काफी उपयोगी साबित होता है.

बैकअप लेकर फोन रीसेट करें- अगर आपके फोन में Repair Mode या Guest Mode नहीं है, तो सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पहले फोन का पूरा बैकअप लें और फिर फोन को रीसेट करके रिपेयर के लिए दें. रिपेयर के बाद आप फिर से लॉगिन करके अपना सारा डेटा डाउनलोड कर सकते हैं.

बैकअप लेकर फोन रीसेट करें- अगर आपके फोन में Repair Mode या Guest Mode नहीं है, तो सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पहले फोन का पूरा बैकअप लें और फिर फोन को रीसेट करके रिपेयर के लिए दें. रिपेयर के बाद आप फिर से लॉगिन करके अपना सारा डेटा डाउनलोड कर सकते हैं.

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अपने स्मार्टफोन को रिपेयर कराना सामान्य बात है, लेकिन लापरवाही महंगी पड़ सकती है. अपना पासवर्ड न शेयर करना, सही मोड का इस्तेमाल करना और जरूरत पड़ने पर फोन को रीसेट करना जैसी आसान सावधानियां आपके पर्सनल जीवन को गंभीर खतरे से बचा सकती हैं.

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