ना खाना, ना टहलाना: इंसानों जैसा एहसास देने वाला रोबोटिक पिल्ला, असली नहीं फिर भी जीत रहा है सभी का दिल
जेनी को देखने और छूने पर ऐसा लगता है जैसे सामने सच में कोई छोटा लैब्राडोर पिल्ला बैठा हो. वह अपनी पूंछ हिलाती है, सिर घुमाती है, कान और मुंह मूव करती है और प्यार से सहलाने पर रिएक्शन भी देती है.
अगर आप उससे बात करें तो वह आपकी आवाज सुनकर जवाब देती है. यही वजह है कि कई लोगों को कुछ देर के लिए यह भूल ही जाता है कि जेनी एक मशीन है.
अकेलेपन से लड़ने में मददगार
Tombot के मुताबिक, जेनी को खासतौर पर डिमेंशिया और Alzheimer’s जैसी बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए डिजाइन किया गया है. ऐसे मरीजों में अकेलापन और बेचैनी आम समस्या होती है.
असली पालतू जानवर उन्हें भावनात्मक सहारा दे सकते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. ऐसे में जेनी एक सुरक्षित और आसान ऑप्शन बनकर सामने आती है. इसके अलावा, एंग्जायटी, PTSD, ऑटिज़्म या ऐसे लोग जो घर में असली पालतू नहीं रख सकते, उनके लिए भी यह मददगार हो सकती है.
इस रोबोटिक पपी को और ज्यादा असली बनाने के लिए Tombot ने मशहूर Jim Henson’s क्रिएटर शॉप के साथ काम किया है. यही टीम फिल्मों और शोज़ में दिखने वाले रियलिस्टिक कैरेक्टर्स बनाती है. जेनी के अंदर लगे सेंसर यह पहचान लेते हैं कि कोई उसे छू रहा है या उससे बात कर रहा है. इसमें AI टेक्नोलॉजी भी है, जिससे यह धीरे-धीरे इंसान के व्यवहार को समझने लगती है.
मोबाइल ऐप से हो जाता है कंट्रोल
जेनी को मोबाइल ऐप से भी कंट्रोल किया जा सकता है. परिवार के सदस्य या केयरगिवर इसमें कमांड सेट कर सकते हैं, नाम बदल सकते हैं और यह भी देख सकते हैं कि मरीज उससे कितना इंटरैक्ट कर रहा है. इसकी बैटरी पूरे दिन साथ निभाने के लिए काफी है.
टॉम्बॉट के CEO टॉम स्टीवंस के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद निजी है, क्योंकि उन्होंने अपनी मां को Alzheimer’s से जूझते देखा है. कंपनी का कहना है कि जेनी इंसानों की जगह नहीं लेती, बल्कि अकेलेपन को कम करने में मदद करती है. करीब 1500 डॉलर की कीमत वाली जेनी को 2026 की गर्मियों में बाजार में उतारने की तैयारी है.
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